|
संविधान
के अनुच्छेद - 45 में राज्य नीति निर्देशक तत्वों के अन्तर्गत यह
व्यवस्था बनाई गई थी कि संविधान को अंगीकृत करके 10 वर्षों के अन्दर
6-14 वय वर्ग के सभी बालक / बालकाओं के लिये नि:शुल्क एवं अनिवार्य
शिक्षा की व्यवस्था की जायेगी किन्तु 57 वर्ष बीत जाने के बाद भी इस
लक्ष्य को प्राप्त नही किया जा सका । यह ठीक है कि 1986 में जब
राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी थी तब से लेकर अब तक विशेष रूप से प्राथमिक
शिक्षा के सत्र में काफी सुधार हुआ है। वैसे हर पंचवर्षीय योजना में
शिक्षा को विशेष महात्व दिया गया है। केन्द्र एवं राज्यों ने दसवी
पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत प्रारम्भिक शिक्षा के सर्व-सुलभीकरण और सभी
के लिये शिक्षा के लक्ष्य की पूर्ति के लिये सर्व शिक्षा अभियान अपनाया
गया है । यह अभियान क्रान्तिकारी है। इस अभियान के अन्तर्गत सभी बच्चें
स्कलों तथा वैकल्पिक शिक्षा केन्द्रों मे होगें लक्ष्य यह भी है कि 6 -
14 वय वर्ग के सभी बच्चें पांच वर्ष की प्रारम्भ्कि शिक्षा पूरी कर ले
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि 2010 तक ऐसी स्थिति आ जाये
कि जो बच्चें स्कूल जाने लगे वे स्कूल जाना बन्द न कर दें।
सर्व शिक्षा अभियान को सफल
बनाने के लिये संविधान मे संशोधन की आवश्यकता थी, जिसके लिये भारतीय
संविधान का 93वाँ संशोधन विधेयक संसद मे पारित कर दिया है और इसके साथ
ही एक ऐसी क्रान्तिकारी व्यवस्था का सूत्रपात हुआ जिसके तहत 6-14 वय
वर्ग के बालक /बालिकाओं को नि:शुल्क और अनिवार्य रूप से शिक्षा दिये
जाने की व्यवस्था करना राज्य सरकारों का कर्तव्य होगा।
राज्य सरकार द्वारा 6-14 वय वर्ग के सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा
उपलब्ध कराने में उच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए कार्यक्रमों का
निर्धारण कर अपनी प्रतिबद्धता को प्रर्दर्शित किया गया है । जहॉ वर्ष
1950 -51 में 34833 प्राथमिक /उच्च् प्राथमिक विद्यालयों में 2875260
बच्चें अध्ययन कर रहे थे वही उनकी संख्या 2006 - 07 से 181487
विद्यालयों मे अध्ययनरत बच्चों की संख्या 35890437 तक पहुंच जाने का
लक्ष्य है। इसी प्रकार वर्ष 1950 - 51 में 84804 अध्यापक शिक्षण कार्य
कर रहे थे वही उनकी संख्या 2006 - 07 में 415990 हैं।
शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को सामाने रखते
हुए राज्य सरकार द्वारा वर्ष 1996 में प्रत्येक 300 आबादी और 1.5
कि०मी० की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय की सुविधा न उपलब्ध होने पर एक
प्राथमिक विद्यालय उपलब्ध कराने एवं 3 कि0मी० की दूरी तथा 800 आबादी पर
एक उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना का मानक निर्धारित करते हुए एक
त्वरित सर्वेक्षण कराया गया था। जनपदों मे सर्वेक्षण के आधार पर
प्राथमिक विद्यालयों की स्वीकृतियां राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई
है। वर्तमान शासनादेश संख्या 20/79-5-2006-198/2005 दिनांक 2-2-2006
द्वारा नवीन प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना में 1.5 कि०मी० की दूरी के
स्थान पर 1किमी० तथा नवीन उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थापना हेतु 3
किमी० के स्थान पर 2 किमी० दूरी निर्धारित की गई है ।
प्रदेश में 6 से 14 तक के बच्चों के अनिवार्य रूप
से नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रारम्भिक शिक्षा के सार्वजनीकरण
के कार्यक्रम को सर्वाधिक वरीयता प्रदान की गई है। इस हेतु शिक्षा के
वार्षिक बजट का अधिकांश भाग इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम पर व्यय करने का
उददेश्य है।
शिक्षा कार्य में चिन्हित कारणों से उत्पन्न ह्रास
एवं अवरोध को समाप्त करने के लिये वर्तमान में पूर्ववर्ती कार्यक्रमों
को और अधिक प्रभावोत्पादक एवं उपयोगी बनाने हेतु विद्यालयों की धारण
क्षमता से अभिवृद्धि की जानी है।
अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन जातियों तथा पिछडे
वर्गो के बालक / बालिकाओं को विद्यालयों मे प्रवेश दिलाने मे विशेष बल
दिया जाता है।
कक्षा 1 से 5 तक के सभी वर्ग के शिक्षाथियों को
नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक एवं कक्षा 6 से 8 तक सभी शिक्षार्थियों को
नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण की व्यवस्था है। इसके साथ ही साथ मध्यान्ह
पोषाहार तथा छात्रवृत्तियों की अधिकाधिक व्यव्स्था की जाती है।
शिक्षा के परिवेश मे सुधार हेतु नये भवनों के
निर्माण के साथ-साथ पुराने भवनों मे सुधार तथा अन्य आवश्यक उपकरणों /शैक्षिक
उपकरणों की व्यवस्था की जाती है।
गत सर्वेक्षण के आधार पर ही वरीयता क्रम मे नये
विद्यालय खोले जाते है।
वित्तीय वर्ष 2006 -07 के लिये अशासकीय उच्च
प्राथमिक विद्यालयों के अनुरक्षण अनुदान
माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में निजी प्रबन्ध
तन्त्र द्वारा संचालित अशासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का योगदान है।
कतिपय कारणों से जनता में दान आदि देने की प्रवृत्ति में कमी के कारण
इन विद्यालय को अनुदान सूची पर लेकर विद्यालयों के कर्मचारियों को वेतन
वितरण कराने की योजना संचालित है।
शासन द्वारा प्रदेश के अशासकीय असहायिक स्थायी
मान्यता प्राप्त पू०मा०वि० को अनुदान सूची मे सम्मिलित करने हेतु
निर्णय लिया गया और शासनादेश संख्या 2813/79-6-2006-28(31) /03 दिनांक
2-12-2006 द्वारा 800 बालक विद्यालय एवं 200 बालिका विद्यालयों को
अनुदानित किया गया है। उक्त अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक /
शिक्षणेत्त्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2006-07 में दिनांक 1
दिसम्बर 2006 से वेतन भुगतान हेतु शासनादेश संख्या
2150/79-6-2006-7(2)/06 टी0सी0-1 दिनांक 10-01-2007 द्वारा रू0 1500.00
लाख की धनराशि स्वीकृत की गई, जिसे सम्बन्धित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
एवं वित्त्त एवं लेखाधिकारी, बेसिक शिक्षा को पत्रांक अर्थ (4)/बेसिक/1391-1691/06-07
दिनांक 23-1-2007 द्वारा इस निर्दश के साथ निर्गत कर दी गई है कि शासन
द्वारा निर्धारित प्रतिबन्धों एवं निर्देशों का अनुपालन करते हुए
जाचोपरान्त भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाय। जनपद एवं मण्डल
स्तर पर उक्त कार्यवाही गतिमान है।
बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित
बेसिक परिषदीय विद्यालयों के अध्यापक/ अध्यापिकाओं को दक्षता पुरस्कार
हेतु अनुदान की स्वीकृति
मैदानी जनपदों के बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश
द्वारा संचालित बेसिक विद्यालयों के उन अध्यापक /अध्यापिकाओं को जो
प्राइम्ररी स्कूलों की कक्षा के छात्र / छात्राओं तथा जूनियर हाईस्कूल
की कक्षा 8 के छात्र/ छात्राओं को पढ़ाते /पढ़ाती है, से सम्बन्ध्रित
नियमावली मे निर्धारित अर्हताओं /शर्तों के अधीन प्रत्येक अध्यापक का
रूपये 500/ - (पांच सौ) मात्र की दर से दक्षता पुरस्कार दिये जाने का
प्राविधान शासनादेश संख्या - 2625/15 (5)-540 /73 दिनांक 30 जून, 1975
के अनुसार निर्धारित अर्हताओं शर्तो अधीन किया जाता है।
इस योजनान्तर्गत शासन द्वारा प्रति वर्ष रू० 4.00
लाख की स्वीकृति प्राप्त होती है जिसे जनपदवार फॉट के अनुसार उत्त्तर
प्रदेश के समस्त बेसिक शिक्षा अधिकारी की द्वारा आवंटित किया जाता है।
शिक्षा मित्र योजना
प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को
ध्यान मे रखते हुए प्राथमिक विद्यालयों मे निर्धारित मानकानुसार छात्र
अनुपात को बनाये रखने एवं ग्रामीण युवा शक्ति को अपने ही ग्राम में
शिक्षा जगत की सेवा का अवसर उपलब्ध कराने हेतु उन्हें उत्प्रेरित करने
के लक्ष्य को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षा मित्र योजना का कर्यान्वयन वर्ष
2000-2001 मे प्रारम्भ किया गया । उक्त योजना 2006-07 से नगर क्षेत्रों
मे भी लागू की गई है।
बेसिक शिक्षा परियोजना (बी0ई0पी0) एवं बेसिक शिक्षा
निदेशालय के अन्तर्गत कुल स्वीक़त 19865 शिक्षा मित्रों के सापेक्ष
17661 शिक्षा मित्र शिक्षण कार्य कर रहे है। शिक्षा मित्रों का चयन
ग्राम शिक्षा समिति/नगर वार्ड समिति द्वारा संस्त़ति /प्रस्ताव करने के
उपरान्त जिला स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदन किये जाने के पश्चात किया
जाता है।
चयनित शिक्षा मित्रों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण
संस्थान द्वारा 30 दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
प्रशिक्षणोपरान्त सम्बन्धित ग्राम शिक्षा समिति शिक्षा मित्र को ग्राम
पंचायत के अधीन जिस विद्यालय हेतु चयनित किया गया है मे शिक्षण कार्य
करने की अनुमति प्रदान करती है। चयनित शिक्षा मित्र का कार्यकाल चालू
शिक्षा सत्र के माह मई के अन्तिम कार्य दिवस को स्वत: समाप्त हो जाती
है तथा उसके कार्य, व्यहवार एवं आचरण से संतुष्ट होने पर जिला स्तरीय
समिति को प्रस्ताव प्रेषित करती है जिसके अनुमति के पश्चात सम्बन्धित
शिक्षा मित्र की पुन: अगले शिक्षा सत्र में 15 दिवसीय प्रशिक्षण
प्रदान करने के उपरान्त शिक्षण कार्य करने की अनुमति प्रदान की जाती
है।
चयनित शिक्षा मित्र को प्रथम 30 दिवसीय प्रशिक्षण
अवधि मे रू0 400/ एवं 15 दिवसीय प्रशिक्षण पुनर्बोधात्मक प्रशिक्षपण
अवधि में रू0 750/ - तथा शिक्षण अवधि मे रू0 3000/- प्रतिमाह की दर से
मानदेय का भुगतान किया जाता है। शिक्षण मित्रों के प्रशिक्षण एवं
मानदेय के भुगतान हेतु रू० 4900.00 लाख का बजट प्राविधान किया गया है।
जिसके सापेक्ष शासन द्वारा रू० 4900.00 लाख की स्वीकृति निर्गत की गई
जिसके सापेक्षय मानदेय हेतु रूपया 3930-93 लाख की धनराशि व्यय की गई।
कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भवन निर्माण
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन निर्माण
हेतु जनपदों में आवश्यकतानुसार (जिला योजनान्तर्गत) जिला बेसिक शिक्षा
अधिकारी कार्यालय भवन निर्माण कराया जाता है। शासन द्वारा जिला बेसिक
शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन निर्माण हेतु रू0 24.65 लाख की निर्माण
लागत निर्धारित की गई। इस धनराशि से छ: नवीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
कार्यालय निर्मित कराये जाने की कार्यवाही की जा चुकी है। तथा पूर्व
वर्षें के छ: अधूरे कार्यालय भवनों के पूर्ण कराने की कार्यावाही की गयी
है।
सघन क्षेत्रीय विकास योजना
भारत सरकार द्वारा शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े जनपदों
के वे ब्लाक जहां की जनसंख्या 20 प्रतिशत या उससे अधिक अल्पसंख्यक
बाहुल्य है जो सघन क्षेत्रीय विकास योजना के अन्तर्गत अच्छादित किया गया
है। इस योजना के अन्तर्गत वर्ष 1994-95 से 2002-03 तक 596 प्राथमिक तथा
950 कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना की गई हैा भारत सरकार
द्वारा वर्ष 2001-02 में 250 कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थापना
हेतु रू0 1170.00 लाख का वित्त्तीय लक्ष्य था जिसके सापेक्ष रू0
1070.89 लाख की धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है (वर्ष् 2001-02 में रू0
400.0 लाख प्रथम किश्त, वर्ष 2002-03 मे स्0 400.00 लाख द्वितीय तथा
वर्ष 2003-04 मे रू0 270.89 लाख की प्रथम किश्त, वर्ष 2002-03 में रू0
400.00 लाख द्वितीय तथा वर्ष 2003-04 में रू0 270.89 लाख की तृतीय
किश्त स्वीकृत की जा चुकी है एवं विद्यालयों का निर्माण किया जा चुका
है विद्यालय भवन की चहारदीवारी के निर्माण हेतु वर्ष 2006-07 मे रू0
110.00 लाख का बजट प्राविधान किया गया लेकिन भारत सरकार से कोई धनरशि
प्राप्त न होने के कारण स्वीकृति निर्गत नही की जा सकी ।
नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक की व्यवस्था
कक्षा 1 से 5 तक के परिषदीय विद्यालयों मे अध्ययनरत
सामान्य वर्ग के बालकों मे वर्ष 2001-02 मे नि:शुल्क पाठ्य पुस्तको के
वितरण हेतु रू0 550.75 लाख की धनराशि व्यय हुई थी जिसके प्रति 2061656
छात्र लाभन्वित हुए थे । वर्ष 2002-03 में रू0 597.55 लाख की धनराशि
व्यय हुई थी जिसके प्रति 22.02,969 छात्र लाभन्वित हुए थे एवं वर्ष
2003-04 में रू0 1138.00 लाख की धनराशि स्वीक़त हुई थी जिसमें से रू0
993.49 की धनरशि व्यय हुई और 34.25,758 छात्र लाभन्वित हुए थे। वर्ष
2004-05 मे उक्त योजनान्तर्गत पुस्तक वितरण नही हुआ। वर्ष 2005-06 में
शासनादेश संख्या 535/75-5-2005-60 (30)/96 दिनांक 14-2-05 द्वारा
निर्णय लिया कि अब सामान्य वर्ग के बालकों मे पाठ्य पुस्तक वितरति किये
जाने की स्थायी व्यव्स्था सुनिश्चित की जाय जिसके तहत रू० 2000.00 लाख
की धनरशि वर्ष 2005-06 के लिये स्वीकृत किया गया जिसमें से रू0 1882.87
लाख व्यय हुआ तथा 6528714 छात्र लाभान्वित हुए । सर्व शिक्षा अभियान के
अन्तर्गत कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत समस्त बालिकाओं तथा अनुसूचति जाति,
जनजाति के बालकों मे निशुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण से कुल
1,54,08,985 छात्र लाभान्वित हुये । इस प्रकार वर्ष 20205-06 में
समान्य वर्ग के बालकों एवं समस्त वर्ग की बालिकाओं तथा अनुसूचित जाति,
जनजाति के बालकों में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण से कुल
219.37.699 छात्र लाभान्वित हुये।
वर्ष 2006 - 07 मे कक्षा 1 से 5 तक के सामान्य वर्ग
के बालकों में निशुल्क पाठ्य पुस्तक वितरण हेतु रू0 22 करोड़ की धनराशि
स्वीकृति जिसमें से रू0 2192.79 लाख व्यय हुआ तथा 6724042 छात्र लाभान्वित
हुए । कक्षा 6 से 8 तक के सामान्य वर्ग के बालको के लिये रू0 2115 लाख
की धनाशि स्वीकृत हई और सम्पूर्ण धनराशि व्यय हुआ जिसके प्रति 1197812
छात्र लाभान्वित हुए । सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत कक्षा 1 से 8 तक
अध्ययनरत समस्त वर्ग की बालिकाएं एवं अनुसूचति जाति, जनजाति के बालकों
मे नि:शुल्क पाठय पुस्तकों के वितरण से 1,59,14,678 छात्र लाभान्वित
हुए। इस प्रकार वर्ष 2006-07 में कक्षा 1 से 8 तक के सामान्य वर्ग के
बालकों एवं अनुसूचित जाति जनजाति के बालकों तथा सभी वर्ग की बालिकाओं
में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों के वितरण से कुल 2,38,36,532 छात्र
लाभान्वित हुये।
स्काउटिंग रेडक्रास तथा जान्स एम्बुलेन्स
स्काउटिंग आन्दोलन के जनक राबर्ट स्टिफैंस स्मिथ
बैडन पावेल थे। भारत स्काउटिंग 1913 में ऐनी बेसेन्ट द्वारा प्रारम्भ
करायी गयी थी । स्काउटिंग से बच्चों से बड़ो तक के उच्च् कोटि की
नैतिकता व योग्यता का विकास किया जाता है । अब भारत स्काउट व गाइड
संस्था है बेसिक शिक्षा परिषद के नियंत्रणाधीन विद्यालयों के छात्रों
को स्काउट /गाइड कार्यक्रमों मे प्रतिभाग कराने के लिये शिक्षा विभाग
प्रत्येक जनपद में स्काउट प्रतियोगिताओं का संचालन कराते है शासन द्वारा
रू0 3.75 लाख का अनुदान दिया जाता है जिसे जनपदों मे बांट कर उपलब्ध
कराया जाता है जिन विद्यालयों मानक पूरे होते है उन्हें रू0 400/
अनुदान राशि दी जाती है। प्रतियोगिताओं के व्यय का वहन विद्यालयों से
प्राप्त स्काउट शुल्क से किया जाता है जूनियर रेडक्रास प्रतियोगिता जो
स्वास्थ्य से सम्बन्धित है, का अयोजन किया जाता है जिसके अध्यक्ष जिला
विद्यालय निरीक्षक होते है। इसके अतिरिक्त सेट जान्स एम्बुलेन्स
प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है इसमें कैडेट डिवीजन तथा मैकन्जी
कोर्स प्रतियोगिता आदि आयोजित की जाती है।
विद्यालयी खेलकूद कार्यक्रम
शैक्षिक संस्थाओं मे शैक्षिक कार्यक्रमों के
साथ-साथ शिक्षणेत्तर कार्यकलापों को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
खेलकूद से ही स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ्य मन का निर्माण होता है।
विद्यालयी खेलकूद कार्यक्रम मे प्रतिस्पर्धा करने का बढावा मिलता है ।
इससे अपने ज्ञान व खेल के स्तर के उन्नयन के प्रति उत्कण्ठा पैदा होती
है। इस हेतु बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय, विद्यालयों, सहायता प्राप्त
विद्यालयों एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों के छात्रों के साथ
अन्तर्विद्यालयीय प्रतियोगिताये ब्लाक व जनपद स्तर पर प्रतिवर्ष आयोजित
की जाती है। इसमें सफल विजयी छात्र मण्डलीय एवं राज्य स्तर की
प्रतियोगिताओं मे प्रतिभाग करता है बेसिक शिक्षा विभाग र्वतमान में 16
खेलों में प्रतियोगिताए अयोजित कराता है। जिनमें चयनित छात्र स्कूल
गेम्स र्फडरेशन आफ इण्डिया द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं मे
प्रतिभाग भाग करते हैं उपरोक्त प्रतियोगिताओं का आयोजन छात्रों से
प्राप्त क्रीड़ा शुल्क से वहन किया जाता है। शासन द्वारा 5.00 लाख रूपये
खेलकूद एव अन्य शैक्षिक कार्यकलापों हेतु अनुदान दिया जाता है जिसका
जनपदवार कांट कर जनपदों को उपलब्ध कराया जाता है। इस धनाशि से खेल
उपकरण एवं अन्य सहायक सामग्रियाँ क्रय की जाती है।
संदर्भ-शिक्षा की प्रगति
प्राथमिक शिक्षा एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और
प्रशिक्षण परिषद उत्तर प्रदेश 2006-2007 शिक्षा निदेशालय उत्तर प्रदेश
इलाहाबाद
||
TOP ||
|